Monday, December 03, 2012

हाइकु दिवस 2007


प्रोफेसर सत्यभूषण वर्मा के 75 वें जन्म दिन को हाइकु दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। भारत में जगह जगह कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
दिल्ली गाजियाबाद में कमलेश भट्ट कमल के आवास पर आयोजित समारोह में प्रो० वर्मा द्वारा हिन्दी हाइकु के लिए किए गए कार्यों की चर्चा होगी।

दो महत्वपूर्ण हाइकु पुस्तकों का लोकार्पण होगा।

इंटरनेट पर हिन्दी हाइकु की स्थिति से अवगत कराने के लिए डा० जगदीश व्योम तथा पूर्णिमा वर्मन शारजाह द्वारा वेबसाइट के प्रदर्शन का कार्यक्रम होगा।

अनेक देशों में रह रहे प्रवासी भारतीय नेट पर उपस्थित रहकर अपनी सहभागिता करेंगे।

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हाइकु दिवस के अवसर पर हाइकु की दो महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, ये पुस्तकें हैं-

१ विश्वभर के बच्चों के द्वारा लिखी गई अनेक भाषाओ की हाइकु कविताओं के हिन्दी अनुवाद सहित पहली बार प्रकाशित पुस्तक-

विश्व भर से बच्चों के हाइकु
हाइकु प्रवेशिका (डा० अंजली देवधर)




किसी प्रवासी भारतीय हाइकुकार की हाइकु कविताओं का सर्व प्रथम हाइकु संग्रह तारों की चूनर हाइकुकार (डा० भावना कुँअर, युगांडा)




हाइकु दिवस के अवसर पर हाइकु की दो महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, ये पुस्तकें हैं
१ विश्वभर के बच्चों के द्वारा लिखी गई उनेक भाषाओ की हाइकु कविताओं के हिन्दी अनुवाद सहित पहली वार प्रकाशित पस्तक
विश्व भर से बच्चों के हाइकु
हाइकु प्रवेशिका
डा० अंजली देवधर
२ किसी प्रवासी भारतीय हाइकुकार की हाइकु कविताओं का सर्व प्रथम हाइकु संग्रह
तारों की चूनर
हाइकुकार डा० भावना कुँअर युगांडा

हाइकु दिवस 2007

हाइकु दिवस पर प्रो० सत्यभूषण वर्मा की याद
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हाइकु कविता आज दुनिया की तमाम भाषाओं में लिखी जा रही है तथा वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक चर्चित हाइकु कविता ही है। मूल रूप से जापान की इस कविता भारत में कविवर रवीन्द्र नाथ टैगोर ने प्रवेश कराया इसके बाद अज्ञेय जी ने हाइकु से प्रभावित होकर हाइकु जैसी लघु आकार की कविताओं की रचना की और जापानी हाइकु कविताओं के अनुवाद किए जिसने हिन्दी साहित्य संसार को प्रभावित किया। इसके बाद जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में जापानी भाषा के पहले प्रोफेसर डा० सत्यभूषण वर्मा ने हाइकु को भारतवर्ष में इस तरह प्रचारित व प्रसारित किया कि आज हिन्दी हाइकु कविता काफी लोकप्रिय है। प्रोफेसर वर्मा ने जापानी से सीधे हिन्दी में हाइकु कविताओं के अनुवाद किए जिससे हाइकु की मूल आत्मा को लोगों ने समझा। डा० वर्मा की ७५ वीं वर्षगाँठ को हाइकु दिवस के रूप में ४ दिसम्बर २००७ को कविनगर गाजियाबाद में समारोह पूर्व मनाया गया।
अनुभूति तथा अभिव्यक्ति वेबपत्रिका और हाइकु पत्रिका 'हाइकु दर्पण' के तत्वावधान एवं कथाकार गज़लकार कमलेश भट्ट कमल के संयोंजन में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जहाँ हाइकु कविता के ध्वजावाहक तथा भारत के जापानी भाषा के पहले प्रोफेसर स्व० डॉ० सत्यभूषण वर्मा को उनकी ७५ वीं वर्षगाँठ के अवसर पर याद किया गया, वहीं हाइकु पर केन्द्रित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों युगाण्डा की अनिवासी भारतीय हाइकुकार डॉ० भावना कुँअर के पहले हाइकु संग्रह 'तारों की चूनर' तथा डॉ० अंजली देवधर के सम्पादन में प्रकाशित ''विश्व भर से बच्चों के हाइकु हाइकु प्रवेशिका' का लोकार्पण भी किया गया।
पुस्तकों का परिचय तथा देश में हाइकु कविता की गति-प्रगति की विस्तृत जानकारी 'हाइकु दर्पण' पत्रिका के सम्पादक तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ० जगदीश व्योम द्वारा दी गयी। डा० व्योम ने बताया कि अकेले हिन्दी में ही २०० से अधिक हाइकु संग्रह/ संकलन प्रकाशित हो चुके हैं, उधर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इंटरनेट पर लगभग एक लाख हाइकु केन्द्रित वेबसाइटें हैं।
'विश्वभर से बच्चों के हाइकु - हाइकु प्रेविशिका' (डा० अंजली देवधर) को उन्होंने दुनिया भर के बच्चों द्वारा लिखी गयी हाइकु कविताओं का अंग्रेजी व हिन्दी में एक साथ प्रकाशित अनूठा द्विभाषिक संकलन बताया तथा तारों की चूनर को किसी प्रवासी भारतीय द्वारा सर्वप्रथम प्रकाशित हाइकु संग्रह बताया। दोनों पुस्तकों की सभी ने मुक्तकण्ठ से प्रशंसा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात गीतकार एवं 'गीताभ' संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश चतुर्वेदी पराग ने की। समारोह में सुप्रसिद्ध बिल्डर एवं कवि बी० एल० गौड़ विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम का प्रारम्भ अनुराधा भट्ट की सांगीतिकी वाणी वन्दना से हुआ तथा संचालन कमलेश भट्ट कमल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में चित्रकार जितेन साहू द्वारा हाइकु की प्रयोगशीलता की चर्चा की गयी। राजनाथ तिवारी डॉ० मधु भारतीय, अंजू जैन द्वारा हाइकु कविताएँ प्रस्तुत की गयीं। आयोजन में वरिष्ठ कथाकार से० रा० यात्री, कवि कृष्ण मित्र, पत्रकार कुलदीप तलवार तथा हरदोई के कवि एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महादेव प्रसाद शर्मा, डॉ० अतुल जैन, कवयित्री नेहा वैद की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।

प्रस्तुति : अनुराधा भट्ट
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* दैनिक जागरण में हाइकु दिवस समारोह का समाचार यहाँ पढ़े

* हाइकु दिवस समारोह विभिन्न समाचार पत्रों में यहाँ देखें

तारों की चूनर पर अनुभूति की संपादक पूर्णिमा वर्मन के कुछ विचार उनके ब्लाग पर



* समारोह के कुछ चित्र

हाइकु दिवस समारोह 2008


दुनिया में सबसे अधिक चर्चित एवं आकार की दृष्टि से सर्वाधिक छोटी मात्र १७ अक्षर की कविता 'हाइकु` पर केन्द्रित 'हाइकु दिवस` का आयोजन साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सभागार में ०४ दिसम्बर को किया गया। रवीन्द्र नाथ टैगोर और उनके बाद अज्ञेय जी ने अपनी जापान यात्राओं से वापस आते समय जापानी हाइकु कविताओं से प्रभावित होकर उनके अनुवाद किए जिनके माध्यम से भारतीय हिन्दी पाठक 'हाइकु` के नाम से परिचित हुए। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली में जापानी भाषा के पहले प्रोफेसर डॉ० सत्यभूषण वर्मा(04-12-1932 ....... 13-01-2005) ने जापानी हाइकु कविताओं का सीधा हिन्दी में अनुवाद करके भारत में उनका प्रचार-प्रसार किया। इससे पूर्व हाइकु कविताओं के जो अनुवाद आ रहे थे वे अंगे्रजी के माध्यम से हिन्दी में आ रहे थे प्रो० वर्मा ने जापानी हाइकु से सीधा हिन्दी अनुवाद करके भारत मे उसका प्रचार-प्रसार किया। परिणामत: आज भारत में हिन्दी हाइकु कविता लोकप्रिय होती जा रही है। अब तक लगभग ४०० से अधिक हिन्दी हाइकु कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और निरन्तर प्रकाशित हो है। प्रो० सत्यभूषण वर्मा के जन्म दिन ४ दिसम्बर कैं हाइकु दिवस के रूप मे मनाने का प्रारम्भ हाइकु कविता की पत्रिका `हाइकु दर्पण' ने २००६ से गाजियाबाद से किया। हाइकु दर्पण के संपादक डॉ० जगदीश व्योम, कमलेश भट्ट कमल एवं डॉ० अंजली देवधर द्वारा हिन्दी हाइकु कविता की गुणवत्ता में सुधार हेतु निरन्तर प्रयास किए जा रहे है। इसी श्रृंखला में यह आयोजन किया गया। हाइकु दिवस समारोह के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ० प्रभाकर श्रोत्रिय ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारम्भ किया। मुख्य अतिथि श्री विजय किशोर मानव (संपादक कादम्बिनी) ने कहा कि हाइकु कविता मन की अतल गहराईयों कैं प्रभावित कर सके ऐसा प्रयास करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आकाशवाणी के केन्द्र निदेशक लक्ष्मीशंकर वाजपेई ने कहा कि हाइकु मन की अनुभूति की कम शब्दों में व्यक्त करने का सर्वाधिक सशक्त माध्यम है। उन्होंने अपनी आकाशवाणी की गोष्ठियों में हाइकु पाठ के लिए भी हाइकुकारों कैं आमंत्रित किए जाने की योजना विषयक जानकारी दी तथा डोगंरी भाषा मे लिखी जा रही हाइकु कविताओं की चर्चा की। विशिष्ट अतिथि डॉ० अंजली देवधर ने अंग्रेजी एवं अन्य भाषाओं में लिखे जाने वाली हाइकु कविताओं की चर्चा करते हुए दुनिया के तमाम देशों में आयोजित हाइकु संगोष्ठियों में भारतीय हाइकु व हिन्दी हाइकु की उपस्थिति व मान्यता विषयक जानकारी देते हुए बताया कि बंगलोर में आयोजित अंग्रेजी भाषा के विश्व हाइकु सम्मेलन में पहली बार हाइकु दर्पण के संपादक को हिन्दी में हाइकु की स्थिति पर शोधपत्र प्रस्तुत करने हेतु आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रभाकर श्रोत्रिय ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि शब्द जैसे-जैसे कम होते जाते है कविता सघन होकर और प्रभावशाली होती जाती है। हाइकु में कम शब्द होते है वहाँ किसी निरर्थक शब्द या अक्षर की गुंजाइश नहीं है इसीलिए एक अच्छा हाइकु बहुत प्रभावशाली होता है। हाइकु दर्पण पत्रिका के संपादक एवं हाइकु दिवस समारोह के संयोजक डॉ० जगदीश व्योम ने विश्व स्तर पर हिन्दी हाइकु की स्थिति की जानकारी दी। इण्टरनेट पर हिन्दी हाइकु के विषय में बताते हुए डा० व्योम ने कहा कि हिन्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय वेबसाइट- अनुभूति एवं अभिव्यक्ति की संपादक पूर्णिमा वर्मन (यू.ए.ई.) ने हाइकु माह जैसे आयोजन किया तथा हाइकु की कार्यशाला आयोजित की और प्रतिदिन एक चुनिन्दा हाइकु चित्र सहित वेबसाइट पर प्रकाशित किया जिन्हें हजारों वेब पाठकों ने प्रतिदिन पढ़ा और सराहा। हिन्दी की अनेक वेबसाइट्स हैं जिन पर हाइकु कविताएँ निरंतर प्रकाशित की जा रही है? कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रसिद्ध हाइकुकार एवं साहित्यकार कमलेशभट्ट कमल ने हाइकु लेखन पर समग्र दृष्टि डालते हुए बताया कि आज के व्यस्ततम समय में मन के अनुभावों को व्यक्त करने के लिए अधिक समय किसी के पास नहीं है ऐसे में हाइकु कविता सर्वाधिक उपयोगी तथा समसामयिक है। प्रो० वर्मा के साथ हमेशा से जुड़े रहे कमलेश भट्ट कमल ने हिन्दी हाइकु यात्रा विषयक विस्तृत जानकारी दी तथा हाइकु १९८९, हाइकु १९९९ जैसे ऐतिहासिक संकलनों के संपादन के बाद प्रस्तावित हाइकु २००९ के संपादन विषयक जानकारी देते हुए हाइकुकारों से हाइकु भेजने हेतु कहा। ओमप्रकाश चतुर्वेदी पराग ने हाइकु कविता को ५-७-५ अक्षरक्रम में मात्र १७ अक्षर तक सीमित रखने विषयक अनुशासन पर प्रश्न उठाया। इस अवसर पर प्रो० सत्यभूण वर्मा की जीवन संगिनी श्रीमती सुरक्षा वर्मा की गरिमामय उपस्थित समारोह का आकर्षण रही। डा० अंजली देवधर को विभिन्न देशों व भाषाओं में हिन्दी हाइकु का प्रचार-प्रसार करने तथा श्रीमती सुरक्षा वर्मा को प्रो० सत्यभूषण वर्मा द्वारा छोडी गई हाइकु यात्रा को निरन्तर आगे बढाने की दिशा में सतत सहयोग देने के लिए समारोह के अध्यक्ष प्रभाकर श्रोत्रिय तथा मुख्यअतिथि कादम्बिनी के संपादक विजय किशोर मानव द्वारा शाल उढाकर सम्मानित किया गया। समारोह में हाइकुकारों ने हाइकु कविताओं का पाठ कर जनसमूह को प्रभावित किया। हाइकु पाठ करने वालों में सर्वश्री- डॉ० कुअँर बेचैन, डॉ० सरिता शर्मा, पवन जैन(लखनऊ), अरविन्द कुमार, लक्ष्मीशंकर वाजपेई, ओम प्रकाश चतुर्वेदी पराग, कमलेश भट्ट कमल, डॉ० जगदीश व्योम, सुजाता शिवेन(उड़िया कवयित्री), ममता किरण वाजपेई, प्रदीप गर्ग आदि प्रमुख थे।हाइकु दिवस समारोह में सुप्रसिद्ध साहित्यकार से.रा.यात्री, सुप्रसिद्ध गजलकार ज्ञान प्रकाश विवेक, इंडिया न्यूज पत्रिका के सहायक संपादक अशोक मिश्र, बी. एल. गौड़, साहित्यकार डॉ० अरुण प्रकाश ढौंढ़ियाल, हरेराम समीप, अमरनाथ अमर, डॉ० तारा गुप्ता, श्रीमती ज्योति श्रोत्रिय, ब्रजमोहन मुदगल, एस.एस.मावई, श्रीमती मावई, श्रीमती अलका यादव, शिवशंकर सिंह, सुधीर, प्रत्यूष, ममता किरन, मृत्युंजय साधक, नीरजा चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे। अन्त में धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ० जगदीश व्योम ने किया।















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हाइकु दिवस समारोह दुनिया में सबसे अधिक चर्चित एवं आकार की दृष्टि से सर्वाधिक छोटी मात्र १७ अक्षर की कविता 'हाइकु` पर केन्द्रित 'हाइकु दिवस` का आयोजन साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सभागार में ०४ दिसम्बर को किया गया। रवीन्द्र नाथ टैगोर और उनके बाद अज्ञेय जी ने अपनी जापान यात्राओं से वापस आते समय जापानी हाइकु कविताओं से प्रभावित होकर उनके अनुवाद किए जिनके माध्यम से भारतीय हिन्दी पाठक 'हाइकु` के नाम से परिचित हुए। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली में जापानी भाषा के पहले प्रोफेसर डॉ० सत्यभूषण वर्मा(०४-१२-१९३२ ....... १३-१२-२००५) ने जापानी हाइकु कविताओं का सीधा हिन्दी में अनुवाद करके भारत में उनका प्रचार-प्रसार किया। इससे पूर्व हाइकु कविताओं के जो अनुवाद आ रहे थे वे अंगे्रजी के माध्यम से हिन्दी में आ रहे थे प्रो० वर्मा ने जापानी हाइकु से सीधा हिन्दी अनुवाद करके भारत मे उसका प्रचार-प्रसार किया। परिणामत: आज भारत में हिन्दी हाइकु कविता लोकप्रिय होती जा रही है। अब तक लगभग ४०० से अधिक हिन्दी हाइकु कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और निरन्तर प्रकाशित हो है। प्रो० सत्यभूषण वर्मा के जन्म दिन ४ दिसम्बर कैं हाइकु दिवस के रूप मे मनाने का प्रारम्भ हाइकु कविता की पत्रिका `हाइकु दर्पण' ने २००६ से गाजियाबाद से किया। हाइकु दर्पण के संपादक डॉ० जगदीश व्योम, कमलेश भट्ट कमल एवं डॉ० अंजली देवधर द्वारा हिन्दी हाइकु कविता की गुणवत्ता में सुधार हेतु निरन्तर प्रयास किए जा रहे है। इसी श्रृंखला में यह आयोजन किया गया। हाइकु दिवस समारोह के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ० प्रभाकर श्रोत्रिय ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारम्भ किया। मुख्य अतिथि श्री विजय किशोर मानव (संपादक कादम्बिनी) ने कहा कि हाइकु कविता मन की अतल गहराईयों कैं प्रभावित कर सके ऐसा प्रयास करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आकाशवाणी के केन्द्र निदेशक लक्ष्मीशंकर वाजपेई ने कहा कि हाइकु मन की अनुभूति की कम शब्दों में व्यक्त करने का सर्वाधिक सशक्त माध्यम है। उन्होंने अपनी आकाशवाणी की गोष्ठियों में हाइकु पाठ के लिए भी हाइकुकारों कैं आमंत्रित किए जाने की योजना विषयक जानकारी दी तथा डोगंरी भाषा मे लिखी जा रही हाइकु कविताओं की चर्चा की। विशिष्ट अतिथि डॉ० अंजली देवधर ने अंग्रेजी एवं अन्य भाषाओं में लिखे जाने वाली हाइकु कविताओं की चर्चा करते हुए दुनिया के तमाम देशों में आयोजित हाइकु संगोष्ठियों में भारतीय हाइकु व हिन्दी हाइकु की उपस्थिति व मान्यता विषयक जानकारी देते हुए बताया कि बंगलोर में आयोजित अंग्रेजी भाषा के विश्व हाइकु सम्मेलन में पहली बार हाइकु दर्पण के संपादक को हिन्दी में हाइकु की स्थिति पर शोधपत्र प्रस्तुत करने हेतु आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रभाकर श्रोत्रिय ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि शब्द जैसे-जैसे कम होते जाते है कविता सघन होकर और प्रभावशाली होती जाती है। हाइकु में कम शब्द होते है वहाँ किसी निरर्थक शब्द या अक्षर की गुंजाइश नहीं है इसीलिए एक अच्छा हाइकु बहुत प्रभावशाली होता है। हाइकु दर्पण पत्रिका के संपादक एवं हाइकु दिवस समारोह के संयोजक डॉ० जगदीश व्योम ने विश्व स्तर पर हिन्दी हाइकु की स्थिति की जानकारी दी। इण्टरनेट पर हिन्दी हाइकु के विषय में बताते हुए डा० व्योम ने कहा कि हिन्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय वेबसाइट- अनुभूति एवं अभिव्यक्ति की संपादक पूर्णिमा वर्मन (यू.ए.ई.) ने हाइकु माह जैसे आयोजन किया तथा हाइकु की कार्यशाला आयोजित की और प्रतिदिन एक चुनिन्दा हाइकु चित्र सहित वेबसाइट पर प्रकाशित किया जिन्हें हजारों वेब पाठकों ने प्रतिदिन पढ़ा और सराहा। हिन्दी की अनेक वेबसाइट्स हैं जिन पर हाइकु कविताएँ निरंतर प्रकाशित की जा रही है? कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रसिद्ध हाइकुकार एवं साहित्यकार कमलेशभट्ट कमल ने हाइकु लेखन पर समग्र दृष्टि डालते हुए बताया कि आज के व्यस्ततम समय में मन के अनुभावों को व्यक्त करने के लिए अधिक समय किसी के पास नहीं है ऐसे में हाइकु कविता सर्वाधिक उपयोगी तथा समसामयिक है। प्रो० वर्मा के साथ हमेशा से जुड़े रहे कमलेश भट्ट कमल ने हिन्दी हाइकु यात्रा विषयक विस्तृत जानकारी दी तथा हाइकु १९८९, हाइकु १९९९ जैसे ऐतिहासिक संकलनों के संपादन के बाद प्रस्तावित हाइकु २००९ के संपादन विषयक जानकारी देते हुए हाइकुकारों से हाइकु भेजने हेतु कहा। ओमप्रकाश चतुर्वेदी पराग ने हाइकु कविता को ५-७-५ अक्षरक्रम में मात्र १७ अक्षर तक सीमित रखने विषयक अनुशासन पर प्रश्न उठाया। इस अवसर पर प्रो० सत्यभूण वर्मा की जीवन संगिनी श्रीमती सुरक्षा वर्मा की गरिमामय उपस्थित समारोह का आकर्षण रही। डा० अंजली देवधर को विभिन्न देशों व भाषाओं में हिन्दी हाइकु का प्रचार-प्रसार करने तथा श्रीमती सुरक्षा वर्मा को प्रो० सत्यभूषण वर्मा द्वारा छोडी गई हाइकु यात्रा को निरन्तर आगे बढाने की दिशा में सतत सहयोग देने के लिए समारोह के अध्यक्ष प्रभाकर श्रोत्रिय तथा मुख्यअतिथि कादम्बिनी के संपादक विजय किशोर मानव द्वारा शाल उढाकर सम्मानित किया गया। समारोह में हाइकुकारों ने हाइकु कविताओं का पाठ कर जनसमूह को प्रभावित किया। हाइकु पाठ करने वालों में सर्वश्री- डॉ० कुअँर बेचैन, डॉ० सरिता शर्मा, पवन जैन(लखनऊ), अरविन्द कुमार, लक्ष्मीशंकर वाजपेई, ओम प्रकाश चतुर्वेदी पराग, कमलेश भट्ट कमल, डॉ० जगदीश व्योम, सुजाता शिवेन(उड़िया कवयित्री), ममता किरण वाजपेई, प्रदीप गर्ग आदि प्रमुख थे।हाइकु दिवस समारोह में सुप्रसिद्ध साहित्यकार से.रा.यात्री, सुप्रसिद्ध गजलकार ज्ञान प्रकाश विवेक, इंडिया न्यूज पत्रिका के सहायक संपादक अशोक मिश्र, बी. एल. गौड़, साहित्यकार डॉ० अरुण प्रकाश ढौंढ़ियाल, हरेराम समीप, अमरनाथ अमर, डॉ० तारा गुप्ता, श्रीमती ज्योति श्रोत्रिय, ब्रजमोहन मुदगल, एस.एस.मावई, श्रीमती मावई, श्रीमती अलका यादव, शिवशंकर सिंह, सुधीर, प्रत्यूष, ममता किरन, मृत्युंजय साधक, नीरजा चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे। अन्त में धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ० जगदीश व्योम ने किया।

हाइकु समारोह





डा० नामवर सिंह और देवेन्द्र सत्यार्थी के साथ प्रो० सत्यभूषण वर्मा











Sunday, September 16, 2012

हाइकु समारोह 08 सितम्बर 2012


हाइकु कविता की अभिव्यक्ति सामर्थ्य तथा शिल्प पर केन्द्रित हाइकु समारोह का आयोजन 08 सितम्बर 2012 को ‘इंटेलिविष्टो’ कम्पनी के सी-131, सेक्टर 2, नोएडा स्थिति सभागार में किया गया। समारोह की आयोजक अर्बुदा ओहरी ने आमंत्रित हाइकुकारों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर हाइकु के प्रसिद्ध संग्रहों तथा हाइकु पत्रिकाओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई।


डा0 जगदीश व्योम ने कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुये कहा कि हाइकु कविता निरंतर लोकप्रिय होती जा रही है, हिन्दी के प्रतिष्ठित रचनाकार हाइकु लिख रहे हैं, हाइकु मात्र सत्रह अक्षर की कविता है इसलिए कभी कभी इसे बहुत सरल विधा समझने की भूल भी होती हरती है, कम अक्षरों में सम्पूर्ण कविता रचना कठिन कार्य है। एक आदर्श हाइकु की तीनों पंक्तियाँ स्वतंत्र होती हैं तथा उसमें गहन अनुभूति की अभिव्यक्ति होती है। कमलेश भट्ट कमल ने साहित्य अकादमी की पत्रिका ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ में प्रकाशित अपने आलेख ‘हाइकु कविता की अभिव्यक्ति सामर्थ्य’ का पुनर्पाठ करते हुए कहा कि-




 ‘अपने सीमित और संक्षिप्त कलेवर के भीतर भी हाइकु को कई अनुशासनों का पालन करना होता है। एक अच्छे और आदर्श हाइकु की तीनों पंक्तियाँ सर्वथा पूर्ण और स्वतंत्र होती हैं, लेकिन तीनों एक साथ मिलकर एक बड़ी और प्रभावपूर्ण कविता रचती हैं। सहजता भी हाइकु का एक ऐसा गुण है, जिसके बिना हाइकु बिखराव का शिकार हो सकता है। सतही और हल्की-फुल्की अभिव्यक्तियाँ भी हाइकु की प्रकृति से मेल नहीं खाती हैं। हाइकु की अर्थवत्ता और सामर्थ्य को समझने के लिए इन चीजों को भी समझना आवश्यक है। अन्यथा किसी वाक्य को तोड़-मरोड़कर 5-7-5 के वर्णक्रम में रख देने वाले अथवा केवल तुकों के लिए लिखने वाले हाइकुकारों की हिन्दी में कोई कमी नहीं है। हाइकु जिस तरह की गम्भीर कविता है उसमें सतही अभिव्यक्तियों के लिए स्थान नहीं रहता है। इसे आप हाइकु की सीमा कह सकते हैं और उसकी गरिमा भी। हाइकु जैसे-जैसे इस गरिमा से च्युत होता जाएगा, वह प्रभाहीन और निष्प्राण होता चला जाएगा।’ इस अवसर पर हाइकु कविता के दिशावाहक प्रो0 सत्यभूषण वर्मा को उनकी इन पंक्तियों के माध्यम से याद किया गया- ‘‘हाइकु का प्रत्येक शब्द एक साक्षात अनुभव होता है और अपने क्रम में एक विशिष्ट अर्थ का द्योतक भी। कविता के अन्तिम शब्द तक पहुँचते ही एक पूर्ण बिंब, एक गहन भावबोध पाठक की चेतना को अभिभूत कर लेता है। अनुभूति जितनी प्रखर होगी, अभिव्यक्ति में भी उतनी ही ताजगी और सजीवता होगी।’’ हाइकु कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा0 जगदीश व्योम ने अनेक सुप्रसिद्ध हाइकुकारों के हाइकु संग्रहों तथा लोकप्रिय हाइकु कविताओं के उदाहरण प्रस्तुत किए जिन्हें भरपूर सराहा गया।


इस अवसर पर डा0 सुधा गुप्ता, डा0 शैल रस्तोगी, डा0 सुरेन्द्र वर्मा, गोपाल बाबू शर्मा, डा0 मिथिलेश दीक्षित, डा0 रामनारायण पटेल, रामनिवास पंथी, रमाकान्त, डा0 भगवतशरण अग्रवाल, डा0 कुँअर बेचैन, आर.पी शुक्ला आदि हाइकुकारों की पुस्तकों से भी प्रतिनिधि हाइकु कविताएँ श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत की गईं। कार्यक्रम की आयोजक अर्बुदा ओहरी ने फेसबुक के हाइकु समूह से जुड़े हाइकुकारों की हाइकु कविताओं में से कुछ श्रेष्ठ हाइकु कविताओं को प्रस्तुत किया जिनमें- शशिकान्त गीते, स्वाति भालोटिया, रजनी भार्गव, पूर्णिमा वर्मन, डा0 सरस्वती माथुर, सोनल रस्तोगी, वीरेश कुमार अरोरा, ज्योर्तिमयी पंत, संध्या सिंह, अरविन्द चौहान, भावना सक्सेना, त्रिलोक सिंह ठकुरेला, नवल किशोर नवल आदि प्रमुख थे।
समारोह में आमंत्रित सुप्रसिद्ध गजलकार एवं हाइकुकार ओमप्रकाश यती ने अपने कुछ हाइकु प्रस्तुत किए-
मैं न पहुँचा
मिट्टी हो गए पिता
राह देखते।

बेटे का घर
फिर भी है सहमी
माँ यहाँ पर।

अर्बुदा ओहरी ने अपने हाइकु के माध्यम से कहा-
पेड़ की जड़ें
माटी भीतर सींचे
जीवन-डोर।

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरेराम समीप के सद्यप्रकाशित हाइकु संग्रह ‘बूढ़ा सूरज’ का लोकार्पण किया गया। समीप जी ने अपने इस हाइकु संग्रह को समस्त हाइकुकारों को समर्पित किया है, इसका लोकार्पण भी समारोह में उपस्थित सभी हाइकुकारो ने मिलकर किया। समीप जी के इस हाइकु संग्रह में 450 हाइकु कविताएँ हैं जिनमें लगभग सभी हाइकु स्तरीय हैं। हाइकु संग्रहों की भीड़ में इस हाइकु संग्रह की अपनी अलग पहचान बनेगी। समीप जी ने संग्रह से अपने कई हाइकु प्रस्तुत किए जिन्हें भरपूर सराहा गया।
["बूढ़ा सूरज" का लोकार्पण करते हुए]






इस अवसर पर कमलेश भट्ट कमल, डा० जगदीश व्योम, ओमप्रकाश यती, अर्बुदा ओहरी, हरेराम समीप, ईप्सा यादव तथा गौरव पाल ने अपनी हाइकु कविताओं का पाठ किया जिन्हें सभी ने सराहा।
[ हाइकु कविता पर विमर्श करते हाइकुकार ]


समारोह में सत्यवीर सिंह मावई, कुसुम भट्ट, अलका यादव, प्रत्यूष आदि उपस्थित रहे ,समारोह अत्यन्त सफल रहा।

Saturday, June 30, 2012

कविता के सात रंग में हाइकु कविता

दिल्ली आकाशवाणी के केन्द्र निदेशक श्री लक्ष्मीशंकर वाजपेयी जी हिन्दी कविता की विभिन्न विधाओं को लोकप्रिय बनाने तथा विविध विधाओं में समसामयिक साहित्य सृजन करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। आकाशवाणी दिल्ली केन्द्र से कविता के सात रंग कार्यक्रम के अन्तर्गत सात विधाओं के कवियों की रचनाओं का पाठ कराते हैं तथा उसे आकाशवाणी के इन्द्रप्रस्थ चैनल से प्रसारित किया जाता है।
दिनांक २७ जून को कविता के सात रंग कार्यक्रम में आमंत्रित श्रोताओं के समक्ष कवितापाठ का आयोजन किया गया इसमें- कृष्ण मित्र ने दोहे, विजय किशोर मानव ने पद, कृष्ण शलभ ने गीत, मदन कश्यप ने छन्दमुक्त कविता, डा० जगदीश व्योम ने हाइकु, अशोक वर्मा ने गज़ल तथा अरुण सागर ने मुक्तक सुनाये। इस कार्यक्रम का प्रसारण ०१ जुलाई २०१२ को दिल्ली आकाशवाणी के इन्द्रप्रस्थ चैनल पर सायं ४ बजकर ५ मिनट पर किया जायेगा, कृपया इसे सुने और अपनी प्रतिक्रिया भेजे।

Friday, June 08, 2012

फेसबुक से कुछ हाइकुकार


सुरेश चौधरी,
 २४ हेर्रिंग टन मेंसन,
८ होचिमिंह सरणी,
कोलकाता ७०००७१,
मो.९८३००१०९८६


 संजीव आर्या
175 नवशील धाम
बिठूर रोड ,
कानपुर 208017
मोबाइल: 08447518275



डा०शिवजी श्रीवास्तव,
२,विवेक विहार
मैनपुरी-२०५००१.
मोबाइल न०-०9412069692


डा. रमा द्विवेदी
१०२ , इम्पीरिअल मनोर अपार्टमेन्ट
बेगमपेट ,हैदराबाद -५०००१६
(आ.प्र.)
फ़ोन न. 040-23404051
(मो.) 09849021742


ज्योतिर्मयी पन्त
ए ४५ रीजेंसी पार्क १
डी एल ऍफ़ फेस ४
गुडगाँव ,हरयाणा
१२२००२
मो ० 09911274074

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महेंद्र कुमार वर्मा
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प्रकाश खत्री
सी - ६ ,
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Thursday, May 31, 2012

हाइकु कविता की अभिव्यक्ति सामर्थ्य

कमलेश भट्ट कमल का एक महत्वपूर्ण लेख " हाइकु कविता की अभिव्यक्ति सामर्थ्य " साहित्य अकादमी की प्रतिष्ठित पत्रिका " समकालीन भारतीय साहित्य " (मार्च-अप्रैल-2012) अंक में प्रकाशित हुआ है।  

Sunday, December 04, 2011

हाइकु सप्ताह कानपुर में

हाइकु सप्ताह २०११ के अन्तर्गत कानपुर में कमलेश भट्ट कमल के आवास पर हाइकु गोष्ठी का आयोजन किया गया। कानपुर में हाइकु पर पहली बार कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम के संयोजक कमलेशभट्ट कमल ने हाइकु कविता के सन्दर्भ में पूरी जानकारी देते हुए बताया कि हाइकु का परिचय गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कराया तथा अज्ञेय जी ने इसे भारत में थोड़ी और गति दी। प्रो० सत्यभूषण वर्मा ने हिन्दी हाइकु का भरपूर प्रचार किया तथा कमलेश भट्ट कमल, भगवतशरण अग्रवाल एवं डा० जगदीश व्योम ने हाइकु को हाइकु दर्पण के माध्यम से हिन्दी साहित्यकारों तक पहुँचाने में बड़ा योगदान दिया है। इस अवसर पर कमलेश भट्ट कमल ने हाइकु - 2009 से एवं अन्य हाइकु की पुस्तकों से हाइकु पाठ किया, जिनमें विशेष रूप से- डा० भगवतशरण अग्रवाल, ओमप्रकाश यती, डा० जगदीश व्योम, रमाकान्त श्रीवास्तव, नलिनीकान्त, नवलकिशोर नवल, पूर्णिमा वर्मन और त्रिलोकसिंह ठकुरेला की प्रतिनिधि हाइकु कविताओं का पाठ किया।
हाइकु कविताओं के पाठ के उपरान्त विनोदकुमार श्रीवास्तव, शैलेन्द्र शर्मा, राजेन्द्र तिवारी, जयराम जय, डा० कमलेश द्विवेदी, अमरीक सिंह दीप, डा० खान हफीज, सत्यप्रकाश शर्मा ने अपनी अपनी कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर दिल्ली से डा० जगदीश व्योम ने आनलाइन रहकर अपनी हाइकु कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम के अन्त में कमलेश भट्ट कमल ने आभार व्यक्त किया। शीघ्र ही नोएडा स्थित कलामित्र में हाइकु की कार्शाला के आयोजन का प्रस्ताव रखा गया जिसे शीघ्र ही कार्यान्वित किया जायेगा।

हाइकु सप्ताह 2011

आज कलामित्र में जाने का अवसर मिला। कलामित्र एक ऐसी संस्था का नाम है जहाँ कलाकारों, साहित्यकारों, नाटककारों, चित्रकारों, संगीतकारों, कवियों आदि सभी को एक साथ मिल बैठकर अपने अपने कला क्षेत्र की विविध गतिविधियों पर चर्चा करने के लिए उचित स्थान एवं चर्चा के अनुरूप वातावरण प्रदान कराता है। नोएडा के सेक्टर 58 में ए-21 में स्थित कलामित्र की स्थापना श्री आर.एन. बाथम ने की। यहाँ कलाकृतियों के प्रदर्शन एवं साहित्यिक विचार विमर्श के लिए बहुत अच्छा वातावरण है। आजकल यहाँ कलाकृतियों की एक सुन्दर गैलरी सजी हुई है जिसे कलाप्रेमी 11 दिसम्बर तक प्रातः 10 बजे से सायं 07 बजे तक देख सकते हैं।
आज डा० जगदीश व्योम ने हाइकु कविता पर यहाँ चर्चा की। हाइकु क्या है ? हाइकु की आज क्या स्थिति है? हाइकु और चित्रकला का पारस्परिक सम्बंध आदि विषयों पर चर्चा हुई। शीघ्र ही हाइकु कार्यशाला का आयोजन यहाँ किया जाएगा।

Wednesday, September 21, 2011

हाइकु दिवस 2008 कुछ लिंक

हाइकु दिवस समारोह दिनांक ०४ दिसम्बर २००८ को साहित्य अकादमी दिल्ली में मनाया गया। जिन पत्र-पत्रिकाओं एवं जालघरों के संपादकों ने हाइकु दिवस समाचार को प्रकाशित किया है, हम उनके आभारी हैं। यहाँ हाइकु पाठकों की सुविधा के लिए लिंक दिए जा रहे हैं जिससे सम्बधित समाचार को यहाँ देखा जा सकता है।
-व्योम

* कविता कोश 
* अनुभूति/अभिव्यक्ति पर समाचार
* साहित्य कुंज में gggggg

हाइकु दिवस समारोह 2007 विभिन्न समाचार पत्रों में