Sunday, January 19, 2014

सन्निधि हाइकु संगोष्ठी

गाँधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा एवं विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के तत्वावधान में राजघाट दिल्ली में हाइकु पर संगोष्ठी का आयोजन 18 जनवरी को किया गया, इस संगोष्ठी में हाइकु के साथ साथ क्षणिकाओं का भी पाठ किया गया। कमलेश भट्ट कमल के साथ इस संगोष्ठी में अनेक मित्रों से भेंट हुई जिन्हें फेसबुक पर ही देखा था। अतुल प्रभाकर और किरण आर्या का यह प्रयास बहुत सराहनीय है। डा॰ राजीव गोयल, सुशीला श्योराण, सुनीता अग्रवाल, अरुण सिंह रुहेला, वन्दना ग्रोवर, सीमान्त, बवली वशिष्ठ, अविनाश वाचस्पति, अभिषेक कुमार अभि आदि सभी से मिलकर बहुत अच्छा लगा। इन सभी का उत्साह देखकर एक विचार आ रहा है कि हाइकु पर एक कार्यशाला दिल्ली में की जा सकती है..... शीघ्र ही कोई उपयुक्त स्थान खोजकर इसकी रूपरेखा बनाई जायेगी..... । सभी सदस्यों ने बहुत अच्छी हाइकु कविताएँ प्रस्तुत की। शिवमूर्ति तिवारी जी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। किरण आर्या ने बहुत अच्छी तरह से संचालन का दायित्व निभाया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में विजयदान देथा की रचनाओं पर आधारित नाट्य मंचन बहुत प्रभावक रहा। 










Thursday, May 30, 2013

हाइकु दर्पण का अगला अंक " हाइकु 1989 " विशेषांक


हाइकु दर्पण का अगला अंक " हाइकु 1989 " विशेषांक के रूप में प्रकाशित होने जा रहा है, जिसमें "हाइकु 1989" में प्रकाशित सभी 30 हाइकुकारों की हाइकु कविताओं को ज्यों का त्यों प्रकाशित किया जायेगा, भूमिका और कुछ टिप्पणियाँ भी रहेंगी। इस ऐतिहासिक हाइकु संकलन का संपादन कमलेश भट्ट कमल तथा रामनिवास पंथी ने किया था। यदि आप इस अंक को पढ़ने में रुचि रखते हैं तो कृपया सूचित करें और हाइकु दर्पण के आजीवन सदस्य बनकर सहयोग प्रदान करें।

-सम्पादक
हाइकु दर्पण

Saturday, March 09, 2013

पूना में आयोजित हाइकु समारोह में

पूना में आयोजित हाइकु समारोह में डा० अंजली देवधर ने सहभागिता की


Monday, December 10, 2012

बुलंदशहर में पहली बार हाइकु दिवस

बुलंदशहर में पहली बार हाइकु दिवस
आज 04 दिसम्बर 2012 को बुलंदशहर में पहली बार हाइकु दिवस मनाया गया. इस कार्यक्रम की अधक्ष्यता वरिष्ठ साहित्यकार राम पल शर्मा विश्वास द्वारा की गयी तथा सञ्चालन रमेश प्रसून द्वारा किया गया. कार्यक्रम में सबसे पहले कमलेश भट्ट कमल द्वारा हाइकु दिवस एवम हाइकु कविता पर चर्चा की गयी तदुपरांत कमलेश भट्ट कमल और रमेश प्रसून द्वारा हाइकु कविताओं का पाठ किया गया। कमलेश भट्ट कमल द्वारा संयोजित इस कार्यक्रम में सर्व श्री शम्भू दत्त त्रिपाठी देवदानपुरी, रवींद्र नाथ गर्ग, राजीव सक्सेना, निर्देश निधि तथा अलका शर्मा द्वारा भी काव्य प्रस्तुतियां दी गयी। इस अवसर पर राजीव सिंह एवं ज्ञानेंद्र की उपस्थिति उल्लेखनीय रही. इस कार्यक्रम के माध्यम से बुलंदशहर के प्रबुद्ध रचनाकारों द्वारा हाइकु कविता की गंभीरता, अर्थ गाम्भीर्य एवं अभिव्यक्ति सामर्थ्य को गहराई से समझा और सराहा गया।



हाइकु दिवस 2012 पर आकाशवाणी दिल्ली से प्रसारण

हाइकु दिवस 2012 पर आकाशवाणी दिल्ली से प्रसारण
हाइकु दिवस के अवसर पर 04 दिसम्बर को आकाशवाणी दिल्ली द्वारा हाइकु पर केन्द्रित परिचर्चा एवं हाइकु कविता पाठ का आयोजन किया गया जिसका प्रसारण आकाशवाणी दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ चैनल से 04 दिसम्बर 2012 को सायं 8 बजे किया गया। कार्यक्रम में सम्मिलित अर्बुदा ओहरी, सुजाता शिवेन, डा० उनीता सच्चिदानन्दन तथा डा० जगदीश व्योम ने हिन्दी हाइकु के प्रेरणा पुरुष डा० सत्यभूषण वर्मा के योगदान पर चर्चा करते हुए हिन्दी हाइकु की स्थिति, हाइकु पर केन्द्रित गतिविधियाँ, पत्र पत्रिकाएँ, इण्टरनेट पर हाइकु की स्थिति आदि पर विमर्श किया। इस अवसर पर हाइकु से सम्बंधित अनेक प्रश्नों के उत्तर डा० जगदीश व्योम नें दिये तथा हाइकु पर हो रहे कुछ महत्वपूर्ण कार्यों की जानकारी देते हुये बताया कि हाइकु कोश का कार्य चल रहा है इसमें अब तक प्रकाशित समस्त हाइकु संग्रहों एवं पत्र पत्रिकाओं से श्रेष्ठ हाइकु कविताओं के चयन का कार्य चल रहा है जिसे हाइकु कोश के रूप में प्रकाशित कराया जायेगा। फेसबुक पर चल रहे हाइकु समूहों की चर्चा भी इस अवसर पर की गई।

हाइकु दिवस 2012 पर रायबरेली में गोष्ठी

जग बहरा, कहॉ तक चिल्लाये, एक कबीर - (जय चक्रवर्ती):: हाइकु दिवस 2012 पर रायबरेली में गोष्ठी : एक रिपोर्ट
रायबरेली (04 दिसम्बर) हाइकु दिवस के अवसर पर ‘यदि‘ पत्रिका परिवार की ओर से हाइकु गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रमोद प्रखर ने तथा संचालन भामसुद्दीन ‘अज़हर‘ ने किया। गोष्ठी के प्रारम्भ में ‘यदि‘ के सम्पादक रमाकान्त द्वारा हाइकु विधा के उद्भव एवं विकास तथा हाइकु दिवस के इतिहास पर संक्षिप्त प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर डा० सत्यभूषण वर्मा को विशेष रूप से याद किया गया। हाइकु गोष्ठी के प्रारम्भ में सुधीर बेकस ने अपने हाइकु प्रस्तुत किये- जीवन क्या है जीकर जान लेते काश हम भी संवेदना ही ज़िन्दा रख सकेगी हम सबको ये दुनिया तो दुनिया ही रहेगी मेरे बाद भी जाना हमने सपने, सपने हैं जागने पर भामसुद्दीन अज़हर ने हाइकु प्रस्तुत किये- जीवन शैली अपनाई हमने कबूतर सी फ़सलें उगीं जीवन में अपने सुविचार की बैठ गये थे नदी किनारे हम आँसू लेकर राम अवध उमराव ने अपने हाइकु प्रस्तुत किये- हम बुद्धू हैं, तुम बद्धिमान हो चलो ठीक है रमाकान्त के ये हाइकु पसन्द किये गये- धरती बोली उड़ो आसमान में मैं हूँ साथ में यही सोचता कट जायेंगे दिन सुख आयेंगे दूर है वह चलना शुरू करो पास है वह कहो कुछ भी उसका कथानक शब्द से परे अजीत आनन्द का हाइकु - बहुत खोजा फिर भी नहीं मिला एक आदमी जय चक्रवर्ती ने हाइकु प्रस्तुत करते हुये कहा- नदी, बादल हवा, ख़ुशबू, फूल तेरे ही रूप हज़ारों मरे सरकारी आँकड़े सौ पर अड़े शायद तुम छिपे हो यहीं कहीं शायद नहीं जग बहरा कहॉ तक चिल्लाये एक कबीर रामनारायण ‘रमण‘ हाइकु प्रस्तुत किये- नाव नदी में मल्लाहों की आँखें नई सदी में गोष्ठी के अध्यक्षता कर रहे प्रमोद प्रखर ने हाइकु प्रस्तुत करते हुये कहा- मौसम आया हाइकु दिवस का रंगोली लाया मरना है तो कुछ करके मरो ऐसे न मरो। अन्त में रमाकान्त द्वारा सभी आगन्तुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

Monday, December 03, 2012

हाइकु दिवस 2007


प्रोफेसर सत्यभूषण वर्मा के 75 वें जन्म दिन को हाइकु दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। भारत में जगह जगह कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
दिल्ली गाजियाबाद में कमलेश भट्ट कमल के आवास पर आयोजित समारोह में प्रो० वर्मा द्वारा हिन्दी हाइकु के लिए किए गए कार्यों की चर्चा होगी।

दो महत्वपूर्ण हाइकु पुस्तकों का लोकार्पण होगा।

इंटरनेट पर हिन्दी हाइकु की स्थिति से अवगत कराने के लिए डा० जगदीश व्योम तथा पूर्णिमा वर्मन शारजाह द्वारा वेबसाइट के प्रदर्शन का कार्यक्रम होगा।

अनेक देशों में रह रहे प्रवासी भारतीय नेट पर उपस्थित रहकर अपनी सहभागिता करेंगे।

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हाइकु दिवस के अवसर पर हाइकु की दो महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, ये पुस्तकें हैं-

१ विश्वभर के बच्चों के द्वारा लिखी गई अनेक भाषाओ की हाइकु कविताओं के हिन्दी अनुवाद सहित पहली बार प्रकाशित पुस्तक-

विश्व भर से बच्चों के हाइकु
हाइकु प्रवेशिका (डा० अंजली देवधर)




२ किसी प्रवासी भारतीय हाइकुकार की हाइकु कविताओं का सर्व प्रथम हाइकु संग्रह तारों की चूनर हाइकुकार (डा० भावना कुँअर, युगांडा)




हाइकु दिवस के अवसर पर हाइकु की दो महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, ये पुस्तकें हैं
१ विश्वभर के बच्चों के द्वारा लिखी गई उनेक भाषाओ की हाइकु कविताओं के हिन्दी अनुवाद सहित पहली वार प्रकाशित पस्तक
विश्व भर से बच्चों के हाइकु
हाइकु प्रवेशिका
डा० अंजली देवधर
२ किसी प्रवासी भारतीय हाइकुकार की हाइकु कविताओं का सर्व प्रथम हाइकु संग्रह
तारों की चूनर
हाइकुकार डा० भावना कुँअर युगांडा

हाइकु दिवस 2007

हाइकु दिवस पर प्रो० सत्यभूषण वर्मा की याद
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हाइकु कविता आज दुनिया की तमाम भाषाओं में लिखी जा रही है तथा वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक चर्चित हाइकु कविता ही है। मूल रूप से जापान की इस कविता भारत में कविवर रवीन्द्र नाथ टैगोर ने प्रवेश कराया इसके बाद अज्ञेय जी ने हाइकु से प्रभावित होकर हाइकु जैसी लघु आकार की कविताओं की रचना की और जापानी हाइकु कविताओं के अनुवाद किए जिसने हिन्दी साहित्य संसार को प्रभावित किया। इसके बाद जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में जापानी भाषा के पहले प्रोफेसर डा० सत्यभूषण वर्मा ने हाइकु को भारतवर्ष में इस तरह प्रचारित व प्रसारित किया कि आज हिन्दी हाइकु कविता काफी लोकप्रिय है। प्रोफेसर वर्मा ने जापानी से सीधे हिन्दी में हाइकु कविताओं के अनुवाद किए जिससे हाइकु की मूल आत्मा को लोगों ने समझा। डा० वर्मा की ७५ वीं वर्षगाँठ को हाइकु दिवस के रूप में ४ दिसम्बर २००७ को कविनगर गाजियाबाद में समारोह पूर्व मनाया गया।
अनुभूति तथा अभिव्यक्ति वेबपत्रिका और हाइकु पत्रिका 'हाइकु दर्पण' के तत्वावधान एवं कथाकार गज़लकार कमलेश भट्ट कमल के संयोंजन में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जहाँ हाइकु कविता के ध्वजावाहक तथा भारत के जापानी भाषा के पहले प्रोफेसर स्व० डॉ० सत्यभूषण वर्मा को उनकी ७५ वीं वर्षगाँठ के अवसर पर याद किया गया, वहीं हाइकु पर केन्द्रित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों युगाण्डा की अनिवासी भारतीय हाइकुकार डॉ० भावना कुँअर के पहले हाइकु संग्रह 'तारों की चूनर' तथा डॉ० अंजली देवधर के सम्पादन में प्रकाशित ''विश्व भर से बच्चों के हाइकु हाइकु प्रवेशिका' का लोकार्पण भी किया गया।
पुस्तकों का परिचय तथा देश में हाइकु कविता की गति-प्रगति की विस्तृत जानकारी 'हाइकु दर्पण' पत्रिका के सम्पादक तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ० जगदीश व्योम द्वारा दी गयी। डा० व्योम ने बताया कि अकेले हिन्दी में ही २०० से अधिक हाइकु संग्रह/ संकलन प्रकाशित हो चुके हैं, उधर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इंटरनेट पर लगभग एक लाख हाइकु केन्द्रित वेबसाइटें हैं।
'विश्वभर से बच्चों के हाइकु - हाइकु प्रेविशिका' (डा० अंजली देवधर) को उन्होंने दुनिया भर के बच्चों द्वारा लिखी गयी हाइकु कविताओं का अंग्रेजी व हिन्दी में एक साथ प्रकाशित अनूठा द्विभाषिक संकलन बताया तथा तारों की चूनर को किसी प्रवासी भारतीय द्वारा सर्वप्रथम प्रकाशित हाइकु संग्रह बताया। दोनों पुस्तकों की सभी ने मुक्तकण्ठ से प्रशंसा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात गीतकार एवं 'गीताभ' संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश चतुर्वेदी पराग ने की। समारोह में सुप्रसिद्ध बिल्डर एवं कवि बी० एल० गौड़ विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम का प्रारम्भ अनुराधा भट्ट की सांगीतिकी वाणी वन्दना से हुआ तथा संचालन कमलेश भट्ट कमल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में चित्रकार जितेन साहू द्वारा हाइकु की प्रयोगशीलता की चर्चा की गयी। राजनाथ तिवारी डॉ० मधु भारतीय, अंजू जैन द्वारा हाइकु कविताएँ प्रस्तुत की गयीं। आयोजन में वरिष्ठ कथाकार से० रा० यात्री, कवि कृष्ण मित्र, पत्रकार कुलदीप तलवार तथा हरदोई के कवि एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महादेव प्रसाद शर्मा, डॉ० अतुल जैन, कवयित्री नेहा वैद की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।

प्रस्तुति : अनुराधा भट्ट
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* दैनिक जागरण में हाइकु दिवस समारोह का समाचार यहाँ पढ़े

* हाइकु दिवस समारोह विभिन्न समाचार पत्रों में यहाँ देखें

तारों की चूनर पर अनुभूति की संपादक पूर्णिमा वर्मन के कुछ विचार उनके ब्लाग पर



* समारोह के कुछ चित्र

हाइकु दिवस समारोह 2008


दुनिया में सबसे अधिक चर्चित एवं आकार की दृष्टि से सर्वाधिक छोटी मात्र १७ अक्षर की कविता 'हाइकु` पर केन्द्रित 'हाइकु दिवस` का आयोजन साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सभागार में ०४ दिसम्बर को किया गया। रवीन्द्र नाथ टैगोर और उनके बाद अज्ञेय जी ने अपनी जापान यात्राओं से वापस आते समय जापानी हाइकु कविताओं से प्रभावित होकर उनके अनुवाद किए जिनके माध्यम से भारतीय हिन्दी पाठक 'हाइकु` के नाम से परिचित हुए। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली में जापानी भाषा के पहले प्रोफेसर डॉ० सत्यभूषण वर्मा(04-12-1932 ....... 13-01-2005) ने जापानी हाइकु कविताओं का सीधा हिन्दी में अनुवाद करके भारत में उनका प्रचार-प्रसार किया। इससे पूर्व हाइकु कविताओं के जो अनुवाद आ रहे थे वे अंगे्रजी के माध्यम से हिन्दी में आ रहे थे प्रो० वर्मा ने जापानी हाइकु से सीधा हिन्दी अनुवाद करके भारत मे उसका प्रचार-प्रसार किया। परिणामत: आज भारत में हिन्दी हाइकु कविता लोकप्रिय होती जा रही है। अब तक लगभग ४०० से अधिक हिन्दी हाइकु कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और निरन्तर प्रकाशित हो है। प्रो० सत्यभूषण वर्मा के जन्म दिन ४ दिसम्बर कैं हाइकु दिवस के रूप मे मनाने का प्रारम्भ हाइकु कविता की पत्रिका `हाइकु दर्पण' ने २००६ से गाजियाबाद से किया। हाइकु दर्पण के संपादक डॉ० जगदीश व्योम, कमलेश भट्ट कमल एवं डॉ० अंजली देवधर द्वारा हिन्दी हाइकु कविता की गुणवत्ता में सुधार हेतु निरन्तर प्रयास किए जा रहे है। इसी श्रृंखला में यह आयोजन किया गया। हाइकु दिवस समारोह के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ० प्रभाकर श्रोत्रिय ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारम्भ किया। मुख्य अतिथि श्री विजय किशोर मानव (संपादक कादम्बिनी) ने कहा कि हाइकु कविता मन की अतल गहराईयों कैं प्रभावित कर सके ऐसा प्रयास करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आकाशवाणी के केन्द्र निदेशक लक्ष्मीशंकर वाजपेई ने कहा कि हाइकु मन की अनुभूति की कम शब्दों में व्यक्त करने का सर्वाधिक सशक्त माध्यम है। उन्होंने अपनी आकाशवाणी की गोष्ठियों में हाइकु पाठ के लिए भी हाइकुकारों कैं आमंत्रित किए जाने की योजना विषयक जानकारी दी तथा डोगंरी भाषा मे लिखी जा रही हाइकु कविताओं की चर्चा की। विशिष्ट अतिथि डॉ० अंजली देवधर ने अंग्रेजी एवं अन्य भाषाओं में लिखे जाने वाली हाइकु कविताओं की चर्चा करते हुए दुनिया के तमाम देशों में आयोजित हाइकु संगोष्ठियों में भारतीय हाइकु व हिन्दी हाइकु की उपस्थिति व मान्यता विषयक जानकारी देते हुए बताया कि बंगलोर में आयोजित अंग्रेजी भाषा के विश्व हाइकु सम्मेलन में पहली बार हाइकु दर्पण के संपादक को हिन्दी में हाइकु की स्थिति पर शोधपत्र प्रस्तुत करने हेतु आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रभाकर श्रोत्रिय ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि शब्द जैसे-जैसे कम होते जाते है कविता सघन होकर और प्रभावशाली होती जाती है। हाइकु में कम शब्द होते है वहाँ किसी निरर्थक शब्द या अक्षर की गुंजाइश नहीं है इसीलिए एक अच्छा हाइकु बहुत प्रभावशाली होता है। हाइकु दर्पण पत्रिका के संपादक एवं हाइकु दिवस समारोह के संयोजक डॉ० जगदीश व्योम ने विश्व स्तर पर हिन्दी हाइकु की स्थिति की जानकारी दी। इण्टरनेट पर हिन्दी हाइकु के विषय में बताते हुए डा० व्योम ने कहा कि हिन्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय वेबसाइट- अनुभूति एवं अभिव्यक्ति की संपादक पूर्णिमा वर्मन (यू.ए.ई.) ने हाइकु माह जैसे आयोजन किया तथा हाइकु की कार्यशाला आयोजित की और प्रतिदिन एक चुनिन्दा हाइकु चित्र सहित वेबसाइट पर प्रकाशित किया जिन्हें हजारों वेब पाठकों ने प्रतिदिन पढ़ा और सराहा। हिन्दी की अनेक वेबसाइट्स हैं जिन पर हाइकु कविताएँ निरंतर प्रकाशित की जा रही है? कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रसिद्ध हाइकुकार एवं साहित्यकार कमलेशभट्ट कमल ने हाइकु लेखन पर समग्र दृष्टि डालते हुए बताया कि आज के व्यस्ततम समय में मन के अनुभावों को व्यक्त करने के लिए अधिक समय किसी के पास नहीं है ऐसे में हाइकु कविता सर्वाधिक उपयोगी तथा समसामयिक है। प्रो० वर्मा के साथ हमेशा से जुड़े रहे कमलेश भट्ट कमल ने हिन्दी हाइकु यात्रा विषयक विस्तृत जानकारी दी तथा हाइकु १९८९, हाइकु १९९९ जैसे ऐतिहासिक संकलनों के संपादन के बाद प्रस्तावित हाइकु २००९ के संपादन विषयक जानकारी देते हुए हाइकुकारों से हाइकु भेजने हेतु कहा। ओमप्रकाश चतुर्वेदी पराग ने हाइकु कविता को ५-७-५ अक्षरक्रम में मात्र १७ अक्षर तक सीमित रखने विषयक अनुशासन पर प्रश्न उठाया। इस अवसर पर प्रो० सत्यभूण वर्मा की जीवन संगिनी श्रीमती सुरक्षा वर्मा की गरिमामय उपस्थित समारोह का आकर्षण रही। डा० अंजली देवधर को विभिन्न देशों व भाषाओं में हिन्दी हाइकु का प्रचार-प्रसार करने तथा श्रीमती सुरक्षा वर्मा को प्रो० सत्यभूषण वर्मा द्वारा छोडी गई हाइकु यात्रा को निरन्तर आगे बढाने की दिशा में सतत सहयोग देने के लिए समारोह के अध्यक्ष प्रभाकर श्रोत्रिय तथा मुख्यअतिथि कादम्बिनी के संपादक विजय किशोर मानव द्वारा शाल उढाकर सम्मानित किया गया। समारोह में हाइकुकारों ने हाइकु कविताओं का पाठ कर जनसमूह को प्रभावित किया। हाइकु पाठ करने वालों में सर्वश्री- डॉ० कुअँर बेचैन, डॉ० सरिता शर्मा, पवन जैन(लखनऊ), अरविन्द कुमार, लक्ष्मीशंकर वाजपेई, ओम प्रकाश चतुर्वेदी पराग, कमलेश भट्ट कमल, डॉ० जगदीश व्योम, सुजाता शिवेन(उड़िया कवयित्री), ममता किरण वाजपेई, प्रदीप गर्ग आदि प्रमुख थे।हाइकु दिवस समारोह में सुप्रसिद्ध साहित्यकार से.रा.यात्री, सुप्रसिद्ध गजलकार ज्ञान प्रकाश विवेक, इंडिया न्यूज पत्रिका के सहायक संपादक अशोक मिश्र, बी. एल. गौड़, साहित्यकार डॉ० अरुण प्रकाश ढौंढ़ियाल, हरेराम समीप, अमरनाथ अमर, डॉ० तारा गुप्ता, श्रीमती ज्योति श्रोत्रिय, ब्रजमोहन मुदगल, एस.एस.मावई, श्रीमती मावई, श्रीमती अलका यादव, शिवशंकर सिंह, सुधीर, प्रत्यूष, ममता किरन, मृत्युंजय साधक, नीरजा चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे। अन्त में धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ० जगदीश व्योम ने किया।















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हाइकु दिवस समारोह दुनिया में सबसे अधिक चर्चित एवं आकार की दृष्टि से सर्वाधिक छोटी मात्र १७ अक्षर की कविता 'हाइकु` पर केन्द्रित 'हाइकु दिवस` का आयोजन साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सभागार में ०४ दिसम्बर को किया गया। रवीन्द्र नाथ टैगोर और उनके बाद अज्ञेय जी ने अपनी जापान यात्राओं से वापस आते समय जापानी हाइकु कविताओं से प्रभावित होकर उनके अनुवाद किए जिनके माध्यम से भारतीय हिन्दी पाठक 'हाइकु` के नाम से परिचित हुए। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली में जापानी भाषा के पहले प्रोफेसर डॉ० सत्यभूषण वर्मा(०४-१२-१९३२ ....... १३-१२-२००५) ने जापानी हाइकु कविताओं का सीधा हिन्दी में अनुवाद करके भारत में उनका प्रचार-प्रसार किया। इससे पूर्व हाइकु कविताओं के जो अनुवाद आ रहे थे वे अंगे्रजी के माध्यम से हिन्दी में आ रहे थे प्रो० वर्मा ने जापानी हाइकु से सीधा हिन्दी अनुवाद करके भारत मे उसका प्रचार-प्रसार किया। परिणामत: आज भारत में हिन्दी हाइकु कविता लोकप्रिय होती जा रही है। अब तक लगभग ४०० से अधिक हिन्दी हाइकु कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और निरन्तर प्रकाशित हो है। प्रो० सत्यभूषण वर्मा के जन्म दिन ४ दिसम्बर कैं हाइकु दिवस के रूप मे मनाने का प्रारम्भ हाइकु कविता की पत्रिका `हाइकु दर्पण' ने २००६ से गाजियाबाद से किया। हाइकु दर्पण के संपादक डॉ० जगदीश व्योम, कमलेश भट्ट कमल एवं डॉ० अंजली देवधर द्वारा हिन्दी हाइकु कविता की गुणवत्ता में सुधार हेतु निरन्तर प्रयास किए जा रहे है। इसी श्रृंखला में यह आयोजन किया गया। हाइकु दिवस समारोह के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ० प्रभाकर श्रोत्रिय ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारम्भ किया। मुख्य अतिथि श्री विजय किशोर मानव (संपादक कादम्बिनी) ने कहा कि हाइकु कविता मन की अतल गहराईयों कैं प्रभावित कर सके ऐसा प्रयास करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आकाशवाणी के केन्द्र निदेशक लक्ष्मीशंकर वाजपेई ने कहा कि हाइकु मन की अनुभूति की कम शब्दों में व्यक्त करने का सर्वाधिक सशक्त माध्यम है। उन्होंने अपनी आकाशवाणी की गोष्ठियों में हाइकु पाठ के लिए भी हाइकुकारों कैं आमंत्रित किए जाने की योजना विषयक जानकारी दी तथा डोगंरी भाषा मे लिखी जा रही हाइकु कविताओं की चर्चा की। विशिष्ट अतिथि डॉ० अंजली देवधर ने अंग्रेजी एवं अन्य भाषाओं में लिखे जाने वाली हाइकु कविताओं की चर्चा करते हुए दुनिया के तमाम देशों में आयोजित हाइकु संगोष्ठियों में भारतीय हाइकु व हिन्दी हाइकु की उपस्थिति व मान्यता विषयक जानकारी देते हुए बताया कि बंगलोर में आयोजित अंग्रेजी भाषा के विश्व हाइकु सम्मेलन में पहली बार हाइकु दर्पण के संपादक को हिन्दी में हाइकु की स्थिति पर शोधपत्र प्रस्तुत करने हेतु आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रभाकर श्रोत्रिय ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि शब्द जैसे-जैसे कम होते जाते है कविता सघन होकर और प्रभावशाली होती जाती है। हाइकु में कम शब्द होते है वहाँ किसी निरर्थक शब्द या अक्षर की गुंजाइश नहीं है इसीलिए एक अच्छा हाइकु बहुत प्रभावशाली होता है। हाइकु दर्पण पत्रिका के संपादक एवं हाइकु दिवस समारोह के संयोजक डॉ० जगदीश व्योम ने विश्व स्तर पर हिन्दी हाइकु की स्थिति की जानकारी दी। इण्टरनेट पर हिन्दी हाइकु के विषय में बताते हुए डा० व्योम ने कहा कि हिन्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय वेबसाइट- अनुभूति एवं अभिव्यक्ति की संपादक पूर्णिमा वर्मन (यू.ए.ई.) ने हाइकु माह जैसे आयोजन किया तथा हाइकु की कार्यशाला आयोजित की और प्रतिदिन एक चुनिन्दा हाइकु चित्र सहित वेबसाइट पर प्रकाशित किया जिन्हें हजारों वेब पाठकों ने प्रतिदिन पढ़ा और सराहा। हिन्दी की अनेक वेबसाइट्स हैं जिन पर हाइकु कविताएँ निरंतर प्रकाशित की जा रही है? कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रसिद्ध हाइकुकार एवं साहित्यकार कमलेशभट्ट कमल ने हाइकु लेखन पर समग्र दृष्टि डालते हुए बताया कि आज के व्यस्ततम समय में मन के अनुभावों को व्यक्त करने के लिए अधिक समय किसी के पास नहीं है ऐसे में हाइकु कविता सर्वाधिक उपयोगी तथा समसामयिक है। प्रो० वर्मा के साथ हमेशा से जुड़े रहे कमलेश भट्ट कमल ने हिन्दी हाइकु यात्रा विषयक विस्तृत जानकारी दी तथा हाइकु १९८९, हाइकु १९९९ जैसे ऐतिहासिक संकलनों के संपादन के बाद प्रस्तावित हाइकु २००९ के संपादन विषयक जानकारी देते हुए हाइकुकारों से हाइकु भेजने हेतु कहा। ओमप्रकाश चतुर्वेदी पराग ने हाइकु कविता को ५-७-५ अक्षरक्रम में मात्र १७ अक्षर तक सीमित रखने विषयक अनुशासन पर प्रश्न उठाया। इस अवसर पर प्रो० सत्यभूण वर्मा की जीवन संगिनी श्रीमती सुरक्षा वर्मा की गरिमामय उपस्थित समारोह का आकर्षण रही। डा० अंजली देवधर को विभिन्न देशों व भाषाओं में हिन्दी हाइकु का प्रचार-प्रसार करने तथा श्रीमती सुरक्षा वर्मा को प्रो० सत्यभूषण वर्मा द्वारा छोडी गई हाइकु यात्रा को निरन्तर आगे बढाने की दिशा में सतत सहयोग देने के लिए समारोह के अध्यक्ष प्रभाकर श्रोत्रिय तथा मुख्यअतिथि कादम्बिनी के संपादक विजय किशोर मानव द्वारा शाल उढाकर सम्मानित किया गया। समारोह में हाइकुकारों ने हाइकु कविताओं का पाठ कर जनसमूह को प्रभावित किया। हाइकु पाठ करने वालों में सर्वश्री- डॉ० कुअँर बेचैन, डॉ० सरिता शर्मा, पवन जैन(लखनऊ), अरविन्द कुमार, लक्ष्मीशंकर वाजपेई, ओम प्रकाश चतुर्वेदी पराग, कमलेश भट्ट कमल, डॉ० जगदीश व्योम, सुजाता शिवेन(उड़िया कवयित्री), ममता किरण वाजपेई, प्रदीप गर्ग आदि प्रमुख थे।हाइकु दिवस समारोह में सुप्रसिद्ध साहित्यकार से.रा.यात्री, सुप्रसिद्ध गजलकार ज्ञान प्रकाश विवेक, इंडिया न्यूज पत्रिका के सहायक संपादक अशोक मिश्र, बी. एल. गौड़, साहित्यकार डॉ० अरुण प्रकाश ढौंढ़ियाल, हरेराम समीप, अमरनाथ अमर, डॉ० तारा गुप्ता, श्रीमती ज्योति श्रोत्रिय, ब्रजमोहन मुदगल, एस.एस.मावई, श्रीमती मावई, श्रीमती अलका यादव, शिवशंकर सिंह, सुधीर, प्रत्यूष, ममता किरन, मृत्युंजय साधक, नीरजा चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे। अन्त में धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ० जगदीश व्योम ने किया।